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आग से झुलसे मरीजों को Cashless Treatment, पंजाब सरकार ने उठाया खर्च

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चंडीगढ़, 11 अगस्त (Punjab Media Team)। आग की घटना भले ही कुछ मिनटों में खत्म हो जाए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति के लिए उपचार और रिकवरी का सफर लंबे समय तक चल सकता है। बार-बार ड्रेसिंग, सर्जरी, चिकित्सा प्रक्रियाओं और पुनर्वास की जरूरत के बीच इलाज का खर्च परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे मरीजों को आर्थिक राहत देते हुए पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत अब तक जलने की चोटों से जुड़े 265 Cashless Treatment उपलब्ध करवाए गए हैं, जिन पर ₹1.39 करोड़ खर्च हुए हैं।

24 वर्षीय अर्जुन कुमार भी इस योजना के लाभार्थी रहे। उनके घर में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने से वह घायल हो गए थे। उपचार के लिए उन्हें बठिंडा ले जाया गया, जहां करीब ₹50,000 का इलाज योजना के तहत कैशलेस किया गया। अर्जुन ने बताया कि घटना के बाद सब कुछ बहुत तेजी से हुआ। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार, 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों में सबसे अधिक 61 उपचार किए गए, जिन पर ₹31.82 लाख खर्च हुए। वहीं, 0 से 18 वर्ष के 39 लड़कों और 27 लड़कियों का उपचार किया गया। महिलाओं में 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक 26 उपचार दर्ज हुए, जबकि 31 से 45 वर्ष की महिलाओं के 21 उपचार किए गए।

जलने की चोटों के लंबे प्रभावों को मेडिकल रिसर्च भी रेखांकित करती है। PubMed में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पंजाब के एक तृतीयक अस्पताल में 892 मरीजों के अध्ययन में 79 प्रतिशत मरीज 15 से 45 वर्ष की आयु के थे। इससे कामकाजी उम्र के लोगों के बीच बर्न केयर की जरूरत स्पष्ट होती है।

पंजाब में 265 बर्न Cashless Treatment, मरीजों को मिली बड़ी राहत

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि जलने की चोट आग बुझने के साथ खत्म नहीं होती। कई मरीजों को लंबे समय तक चिकित्सा प्रक्रियाओं, पुनर्वास और देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य परिवारों को इलाज के खर्च की चिंता से राहत देकर मरीजों को रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है।

इन उपचारों में पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर के 75 उपचार शामिल हैं, जिन पर ₹38.90 लाख खर्च हुए। इसके अलावा स्किन फ्लैप, डिब्राइडमेंट, टिश्यू एक्सपैंडर, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, बिजली व रासायनिक जलन का उपचार तथा कान-नाक का रिकंस्ट्रक्शन भी शामिल है।

जिला स्तर पर बठिंडा में सबसे अधिक 57 लाभार्थियों को 63 उपचार मिले, जिन पर ₹33.51 लाख खर्च हुए। इसके बाद फरीदकोट में 40 और पटियाला में 39 लाभार्थी दर्ज किए गए। रूपनगर, एसएएस नगर और फतेहगढ़ साहिब में एक-एक लाभार्थी दर्ज हुआ।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि Cashless Treatment का अर्थ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मरीज और परिवार को इलाज के दौरान मानसिक राहत देना भी है।

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