Drug Traffickers के खिलाफ चल रहा अभियान अब सिर्फ़ गिरफ्तारी तक नहीं सीमित
चंडीगढ़ | 6 अप्रैल 2026 (Punjab Media Team)। पंजाब में नशे और Drug Traffickers के खिलाफ चल रहा अभियान अब सिर्फ़ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालतों में मजबूत सज़ा दिलाने के मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रहे अभियान ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ ने पुलिसिंग के पूरे ढांचे को बदल दिया है। अब फोकस इस बात पर है कि तस्कर सिर्फ पकड़े न जाएं, बल्कि कोर्ट में सज़ा से बच भी न सकें।
पंजाब ने NDPS मामलों में देश की सबसे ऊँची Conviction Rate (सज़ा दर) हासिल की है, जो 2026 में लगभग 89% तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि जांच और अभियोजन में किस स्तर पर सुधार हुआ है। 2022 में जहां यह दर 80% थी, वहीं 2023 में 81%, 2024 में 85% और 2025 में 88% तक पहुंच गई। लगातार बढ़ती यह दर एक सुनियोजित और मजबूत पुलिसिंग रणनीति का नतीजा है।
इस सफलता की सबसे बड़ी वजह पुलिसिंग में आया संरचनात्मक बदलाव है। अब जांच केवल FIR और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि prosecution-led investigation पर आधारित होती है। यानी केस की शुरुआत से ही यह ध्यान रखा जाता है कि कोर्ट में कौन से सबूत टिकेंगे और किन प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। NDPS एक्ट की सख्ती को देखते हुए पुलिस हर कदम पर कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रही है ताकि कोई भी तकनीकी कमी आरोपी को राहत न दे सके।
Drug Traffickers Conviction Rate : जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर मजबूत
पंजाब पुलिस ने जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर मजबूत किया है। ड्रग्स की जब्ती से लेकर उनकी फोरेंसिक जांच और chain of custody को बेहद सख्ती से लागू किया जा रहा है। यही कारण है कि अदालतों में पेश किए गए सबूत मजबूत रहते हैं और बचाव पक्ष के लिए उन्हें चुनौती देना मुश्किल हो जाता है।
इसके साथ ही एक विस्तृत 60-पॉइंट SOP (Standard Operating Procedure) लागू की गई है, जो हर जांच अधिकारी के लिए अनिवार्य है। इस SOP में तलाशी, जब्ती, दस्तावेज़ीकरण और गवाहों की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इससे जांच में एकरूपता आई है और केस की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है।
पंजाब पुलिस ने जांच अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया है। राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के साथ मिलकर एक सर्टिफिकेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसमें अब तक 400 से ज्यादा जांच अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। यह ट्रेनिंग उन्हें कानूनी बारीकियों, फोरेंसिक तकनीकों और कोर्ट में केस पेश करने की रणनीति सिखाती है।
बड़ा बदलाव intelligence-based policing के रूप में आया सामने
एक और बड़ा बदलाव intelligence-based policing के रूप में सामने आया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और गुमनाम सूचना सिस्टम के जरिए आम नागरिकों को भी इस लड़ाई में शामिल किया गया है। लोगों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर पुलिस बड़े नेटवर्क तक पहुंच रही है और संगठित तस्करी पर प्रहार कर रही है।
इसके अलावा, केवल ड्रग्स पकड़ने तक सीमित न रहकर अब तस्करों की आर्थिक रीढ़ पर भी हमला किया जा रहा है। NDPS कानून के तहत ड्रग्स से कमाई गई संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें फ्रीज़ और जब्त किया जा रहा है। सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई इस रणनीति का अहम हिस्सा है, जिससे तस्करों के लिए यह धंधा कम लाभदायक होता जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि असली डर गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि सज़ा की निश्चितता से पैदा होता है। जब किसी आरोपी को यह पता होता है कि गिरफ्तारी के बाद बच निकलना मुश्किल है और संपत्ति भी जब्त हो सकती है, तो यह पूरे नेटवर्क के लिए एक कड़ा संदेश बनता है।
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