नाबार्ड से हरियाणा को मिलेगा 2.27 लाख करोड़ से अधिक का ऋण!
चंडीगढ़। हरियाणा में कृषि, एमएसएमई, शिक्षा, आवास, निर्यात और नवीनीकरण ऊर्जा जैसे प्राथमिकता क्षेत्रों के विकास हेतु राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा राज्य के लिए वर्ष 2024-25 के लिए 2,27,821 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की संभावनाओं के साथ स्टेट फोकस पेपर तैयार किया गया है, जोकि गत वर्ष की तुलना में 32.76 प्रतिशत अधिक है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए 1.02 लाख करोड़ रुपये के ऋण का अनुमान शामिल है।
यह जानकारी मंगलवार को यहां हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जे.पी. दलाल ने नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में स्टेट फोकस पेपर-2024-25 का विमोचन करने उपरांत दी। स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, 31 दिसंबर, 2023 तक हरियाणा की ऋण भुगतान में कैश डिपॉजिट की दर 84 प्रतिशत है, जबकि यह दर राष्ट्रीय स्तर पर 60 प्रतिशत निर्धारित है।
वर्ष 2023-24 के दौरान हरियाणा में कृषि क्षेत्र ने 8.1 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो देश में सबसे अधिक में से एक है। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हरियाणा भौगोलिक दृष्टि से छोटा राज्य होने के बावजूद लगभग 4 प्रतिशत का योगदान देता है।
छोटे व सीमांत किसानों और गरीबों के लिए ऋण उपलब्ध करवाएं बैंक
कृषि मंत्री दलाल ने कहा कि नाबार्ड बैंकों को निर्देश दे कि वे गांव में रह रहे छोटे व सीमांत किसानों और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुविधाजनक तरीके से उनकी आवश्यकतानुसार ऋण उपलब्ध करवाएं। उन्होंने नाबार्ड के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अगले वर्ष का फोकस पेपर तैयार करते समय इस बात का भी उल्लेख करें कि ग्रामीण क्षेत्र में कितने उद्यमी तैयार किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि हमें फसल विविधीकरण व प्रसंस्करण पर जोर देना होगा और इसके लिए बैंक ऋण उपलब्ध करवाएं, ताकि किसान आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि कुछ निजी बैंक किसानों को भूमि के नाम पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं, जबकि बैंकों को प्रोजेक्ट पर ऋण देना चाहिए, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भर आएगी।
इसके अलावा, पशुपालन जो कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्त्रोत भी है, उसे बढ़ावा देने हेतु बैंकों को गाय, भैंस पालन के लिए ऋण उपलब्ध करवाना चाहिए। इसी प्रकार, नाबार्ड को ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अलावा पॉली हाउस, मशरूम, फूलों की खेती के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों तथा पशु नस्ल सुधार जैसे कार्यक्रमों को भी अपनी योजनाओं में शामिल करने की जरूरत है।
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