EDUCATION

रेबीज: गर्मियों में ज्यादा आक्रामक होते हैं कुत्ते

Punjab Media

भारत मे डॉग बाइट की वजह से Rabies के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दरअसल, इंसानों की तरह से कुत्तों की गर्मी पसीने की तरह से नहीं निकलती है। मुंह के रास्ते ली जाने वाली सांस से वो अपने शरीर की गर्मी को मेंटेन करते हैं। जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है तो ऐसा करने में उन्हें बहुत तकलीफ होती है।

इसके चलते उनके अंदर चिड़चिड़ापन आ जाता है। डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा बताते हैं कि खासतौर पर गर्मी के मौसम में कुत्ते बहुत आक्रामक हो जाते हैं। उसकी वजह ये है कि 40 से 45 डिग्री तापमान होने पर उनकी यह गर्मी और बढ़ जाती है।

जागरुकता की कमी के चलते लोग गली के कुत्तों की परेशानी को समझ नहीं पाते हैं। चौंकाने वाले आंकड़े हैं कि दुनियाभर में रेबीज बीमारी से 36 फीसदी मौत अकेले भारत में होती है। ये आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़े हंै, जो देशभर के लिए चिन्तनीय हंै।

चुनौती भरा कार्य, पर करना जरूरी | Rabies

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रेबीज कुत्ते व बिल्ली सहित विभिन्न किसी संक्रमित जानवर की लार या काटने से फैलती है।
  • अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप समूह को छोड़कर भारत में हर जगह मानव और जानवरों में रेबीज के मामले सामने आते हैं।
  • एसोसिएशन आफ प्रीवेंशन एंड कंट्रोल का रेबीज और इंडिया के अनुसार भारत में सालाना 1.7 करोड़ कुत्ते द्वारा काटने के मामले सामने आते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में रैबीज से होने वाली मौतों में से 65% मौतें भारत में होती है।
  • एनसीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार रेबीज से होने वाली अधिकांश मौतें एशिया 59.6% और अफ्रीका 36.4% में होने का अनुमान है।
  • रेबीज मामले का शिकार लोगों में 40 फीसदी बच्चे होते हैं और वह सबसे असुरक्षित होते हैं।

ऐसे करें बचाव | Rabies

  • डॉग स्पेशलिस्ट एवं पशु चिकित्सक राहुल सरसावा ने कुछ उपाय सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर रेबीज से बचाव संभव है।
  • पहली बात तो घर में रखे जाने वाले पालतू जानवरों खासकर कुत्ते और बिल्लियों की वैक्सिनेशन करवानी चाहिए।

कई बार हम ऐसा सोच लेते हैं कि जिस कुत्ते से डॉग वाइट हुई है उसे हमें पहले ही टीका लगाया हुआ है ऐसी स्थिति में हम खुद वैक्सीनेशन नहीं करवाते, यही सबसे बड़ी लापरवाही का कारण है। कुत्ते या बिल्ली के काटने के बाद हर इंसान को नजदीक के सरकारी अस्पताल में जाकर वैक्सीनेशन जरूर करवानी चाहिए।

  • यह सुविधा केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की ओर से नि:शुल्क उपलब्ध है।
  • सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में मामूली फीस देकर भी यह इंजेक्शन लगवाए जा सकते हैं।

तीसरा व सबसे जरूरी काम यह है कि डॉग बाइट होने के बाद शरीर पर जिस भी जगह पर घाव बनता है, उसे कम से कम 10 से 15 मिनट तक नल के नीचे धोना चाहिए।

ऐसा करने से कुत्ते व बिल्ली की लार में मौजूद वायरस मनुष्य की बॉडी में प्रवेश नहीं कर पाते। इसके बाद अपने नजदीकी चिकित्सक से सलाह लेकर उचित उपचार करवाते हुए वैक्सीनेशन जरूर करवानी चाहिए। विशेषकर गर्मी के मौसम में ऐसे जानवरों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। बच्चा हो या बूढ़ा, महिला हो या पुरूष आजकल सभी कुत्तों के शिकार हो रहे हैं।

रेबीज होता क्यों है? | Rabies

भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में आजकल कुत्ते व बिल्ली सहित पालतू जानवर रखने का रिवाज सा बनता जा रहा है। घरों में पालतू जानवर एक पारिवारिक सदस्य के तौर पर रहते हैं। कई बार आवेश में आकर यह पालतू जानवर आक्रामक होकर हमला भी कर देता हंै। वहीं कई बार लाड-प्यार में ऐसे जानवरों के साथ खेलते हुए भी चोटिल हो जाते हैं।

यही सबसे बड़ी वजह है रेबीज होने की। भारत के केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने रेबीज पर 2022 तक की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2022 में 22 लाख, जबकि 2021 में 17 लाख मामले सामने आए थे।

भारत में कुत्तों के काटने की वार्षिक अनुमानित संख्या 17.4 मिलियन है, जिससे प्रति वर्ष मानव रेबीज के करीब 20 हजार मामले सामने आते हैं। रेबीज एक घातक बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन जागरूकता से जोखिम कम किया जा सकता है। हालांकि आक्रामक होती कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए मंत्रालय की ओर से कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

Read Also:
पैसे की बचत करें भविष्य को सुरक्षित करें

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।


Punjab Media

Punjab Media

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button