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मोदी सरकार पर बरसे मान, E-20 Petrol नीति को बताया जनविरोधी फैसला

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चंडीगढ़, 4 अगस्त (Punjab Media Team)। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को ई-20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा जोरदार ढंग से गूंजा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार पर बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन के E-20 Petrol लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार स्वयं संसद में स्वीकार कर चुकी है कि ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों की माइलेज घटती है, इसके बावजूद इसे पूरे देश में लागू किया गया है। इस दौरान पंजाब विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों में से चुनने का विकल्प देने तथा E-20 Petrol की कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम रखने की मांग की।

विधानसभा में बहस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि E-20 Petrol बिना किसी व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण या विशेषज्ञ संस्थानों की स्पष्ट अनुशंसा के देश के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया कि ई-20 सभी प्रकार के इंजनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ई-10 के लिए तैयार किए गए वाहनों को अचानक ई-20 के अनुरूप मान लिया गया, जबकि लाखों वाहन मालिकों को इसके संभावित प्रभावों की जानकारी तक नहीं दी गई।

ख्यमंत्री ने दावा किया कि 45 हजार से अधिक वाहनों पर किए गए एक सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत वाहनों की माइलेज घटने और 45 प्रतिशत वाहनों में इंजन संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग वर्षों की बचत या बैंक ऋण लेकर वाहन खरीदते हैं और अब उन्हें बढ़े हुए ईंधन खर्च तथा मरम्मत का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।

E-20 Petrol से माइलेज घटने की बात केंद्र ने संसद में मानी: मान

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले माइलेज संबंधी शिकायतों को खारिज किया था, लेकिन बाद में संसद में यह स्वीकार किया कि E-20 Petrol के उपयोग से माइलेज में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि हर वाहन चालक अपने वाहन की माइलेज स्वयं देख सकता है और इस वास्तविकता को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता।

ई-20 नीति के पीछे व्यापारिक कारण होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक है और भारत पर इस दिशा में दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी कौन-सी मजबूरी में हैं कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकना पड़ रहा है और उनकी हर शर्त स्वीकार करनी पड़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार E-20 Petrol को बढ़ावा देना चाहती है तो उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराए जाएं ताकि लोग अपनी आवश्यकता और वाहन की क्षमता के अनुसार विकल्प चुन सकें। साथ ही ई-20 पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखी जाए ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

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