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सरपंच गुरप्रीत ग्रेवाल की हुई बल्ले बल्ले, कुछ ही समय में बदल दी गांव कलाल माजरा की नुहार

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अमलोह का नम्बर वन गांव बना कलाल माजरा

पंजाब में पंचायती चुनावों का बिगुल बज चुका है व गांवों में सरपंच बनने के चाह्वानों ने भी अपनी तैयारी शुरु कर दी है, लेकिन कोई ही सरपंच ऐसा होता है, जो अपने कार्याकाल दौरान अपने गांव की नुहार बदलता है, वहीं गांव की बुनियादी सुविधाओं को पूरा करते, गांव में आपसी भाईचारे की मिसाल पैदा करता है। ऐसे ही सरपंच हैं गुरप्रीत सिंह ग्रेवाल, जो ब्लॉक अमलोह से तकरीबन 13 किलोमीटर दूर गांव कलाल माजरा के सरपंच थे, जिन्होंने अपने कार्याकाल में गांव में पार्क, सोलिड वैसट ट्रीटमैंट प्लांट, ओपन व इनडोर जिंम, खाली पड़ी लोगों के कब्जे अधीन सांझी जगहों की निशानदेही करवाकर अवैध कब्जे हटवाए व वहां मिन्नी जंगल, खेल ग्राऊंडों के अलावा कई लोक हित्त के कार्य कर गांव की नुहार ही बदल दी।

सरपंच गुरप्रीत सिंह ग्रेवाल की कहानी उनकी जुबानी

अपना कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंच गुरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने बताया कि हमारे गांव कलाल माजरा के लोग आज से तकरीबन 6 साल पहले नरकभरी जिन्दगी जीने के लिए मजबूर थे। यह गांव इतना पिछड़ा हुआ था कि न गांव में स्कूल अच्छा था, न धर्मशाला, न खेल मैदान, न ही लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल रही थीं, यहां तक कि गांव की जड़ मुनियाद माना जाता ‘नगर खेड़ा’ भी इस गांव में नहीं था।

उन्होंने बताया कि सरपंच बनने के तुरंत बाद ही गांव की योजनाबन्दी शुरु कर दी। अनाउंसमैंट से पूरे गांव को बताया गया कि महीने की हर 5 तारीख को पंचायत ‘पब्लिक मीटिंग’ करेगी, जहां लोगों की समस्याएं पूछी जाएंगी, उनका हल किया जाएगा। गांव के विकास संबंधी विचार होंगे व पंचायत हर माह अपनी कार्यप्रणाली के बारे में बताएगी।

इस तरह पहली मीटिंग में ही लोगों का भारी इकट्ठ देखने को मिला व इस मीटिंग में ही गांव की बेहतरी के लिए कमेटियों का गठन हुआ, जिनमें ‘नशा छुड़वाने व समाज सुधार कमेटी’, सलाहकार व देख-रेख कमेटी आदि। इसके साथ ही आशा वर्करों व आंगनवाड़ी वर्करों को इन मीटिंगों में लाजमी बुलाया जाता था।

गांव में करवाए विकास कार्यों का ब्यौरा

  • सबसे पहले गांव में ‘नगर खेड़ा’ का निर्माण करवाया।
  • पूरे गांव के सांझे रास्तों व सांझी जगहों की निशानदेही करवाकर अवैध कब्जे दूर करवाए गए।
  • दूषित पानी की निकासी के लिए सीवरेज डाला।
  • इंटरलाक टाईलों से गलियां पक्की करवाई।
  • कंक्रीट से बाहर की फिरनी तैयार की गई।
  • गांव में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए।
  • जोहड़ों की सफाई करवाई गई।
  • तकरीबन ढ़ाई एकड में जोहड़ बंद कर शहीद ऊधम सिंह के नाम पर पार्क व खेल मैदान तैयार करवाया।
  • ओपन जिंम व इनडोर जिंम की बिल्डिंग बनवाई।
  • जरूरतमंदों को पक्के मकान व पशु शैड बनाकर दिए गए।

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