होशियारपुर, 5 सितंबर (Punjab Media Team)। शिक्षक दिवस के मौके पर दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और आप पंजाब प्रभारी Manish Sisodia ने होशियारपुर में 200 से अधिक सरकारी स्कूलों के अध्यापकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और इसमें अध्यापकों की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया।
Manish Sisodia ने कहा कि पंजाब की शिक्षा में बदलाव की कहानी सरकारी फाइलों में नहीं, बल्कि कक्षाओं में अध्यापकों द्वारा लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं और ऐसे सपनों को पूरा कर रहे हैं, जिन्हें कभी उनकी पहुंच से बाहर माना जाता था।
उन्होंने पंजाब की कक्षाओं में पढ़ाई के नतीजों में राज्य के नंबर-1 स्थान पर रहने का उल्लेख करते हुए इसका श्रेय अध्यापकों की क्षमता और प्रतिबद्धता को दिया। Manish Sisodia ने कहा कि सरकारें बेहतर संसाधन, प्रशिक्षण और अनुकूल माहौल उपलब्ध करा सकती हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव अध्यापक और विद्यार्थी के बीच कक्षा में होता है।
सिंगापुर, फिनलैंड और IIM अहमदाबाद में प्रशिक्षण का जिक्र
मनीष सिसोदिया ने भगवंत मान सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को सिंगापुर, फिनलैंड और IIM अहमदाबाद जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस बात का संदेश है कि पंजाब के भविष्य के निर्माण में अध्यापकों की केंद्रीय भूमिका है।
उन्होंने अध्यापकों को “समाज का पायलट” बताते हुए कहा कि जिस तरह विमान में बैठे यात्रियों को पायलट पर भरोसा होता है, उसी तरह पूरी पीढ़ी के भविष्य की दिशा एक अध्यापक के हाथों में होती है।
सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षा पास करवाना या रोजगार के लिए तैयार करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा के जरिए युवाओं में जिम्मेदार फैसले लेने, भ्रष्टाचार को नकारने, नशे से दूर रहने, दूसरों का सम्मान करने और समाज के विकास में योगदान देने की क्षमता भी विकसित की जानी चाहिए।
टांडा में 40 से बढ़कर 400 से अधिक हुए विद्यार्थी : Manish Sisodia
संवाद के दौरान टांडा के एक सरकारी स्कूल का उदाहरण भी सामने आया। अध्यापक नरिंदर अरोड़ा ने बताया कि उनके स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 40 से कम रह जाने के कारण उसे दूसरे स्कूल में मर्ज किए जाने का खतरा था। इसके बाद अध्यापकों ने अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क किया, जिससे स्कूल में दाखिला बढ़कर 400 से अधिक हो गया।
सिसोदिया ने इसे अध्यापकों की “ओनरशिप” बताते हुए कहा कि इन शिक्षकों ने चंडीगढ़ से किसी आदेश का इंतजार करने के बजाय अपने स्कूल की जिम्मेदारी खुद उठाई और समाज का भरोसा जीता।
पीएम श्री सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कमाही देवी के प्रिंसिपल राजेश सिंह ने बताया कि उनके स्कूल के विद्यार्थी अब NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
वहीं, सरकारी एलीमेंट्री स्कूल बजवाड़ा की अध्यापिका रमिंदर कौर ने बताया कि GMAT और TOEFL पास करने तथा विदेश जाने के अवसर होने के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल में अध्यापक बनने का फैसला किया।
‘रीडिंग कंप्रिहेंशन ऐप’ से विद्यार्थियों को फायदा : Manish Sisodia
अध्यापिका मोनिका ने सरकार की ‘रीडिंग कंप्रिहेंशन ऐप’ के प्रभाव के बारे में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की अंग्रेजी समझने, धाराप्रवाह बोलने और आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब देने की क्षमता में सुधार हुआ है।
सिसोदिया ने कहा कि सरकारों को केवल शिक्षक दिवस पर अध्यापकों को याद करने के बजाय उनके कक्षा-कक्ष के अनुभवों को सुनने के लिए नियमित मंच तैयार करने चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा नीति बनाने में अध्यापकों की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बजट से इमारतें और टेंडरों से तकनीक खरीदी जा सकती है, लेकिन बच्चे का भविष्य एक प्रेरित अध्यापक ही गढ़ सकता है। पंजाब के अध्यापक आज के विद्यार्थियों के साथ-साथ कल के पंजाब का निर्माण कर रहे हैं।
कार्यक्रम में पंजाब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जय कृष्ण सिंह रौड़ी, डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन, सांसद राज कुमार छाबेवाल, विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा, जसबीर सिंह राजा गिल, एडवोकेट करमबीर सिंह घुम्मण, डॉ. ईशांक कुमार, मुकेरियां हलका इंचार्ज सरबजोत सिंह साबी, मेयर परवीन सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर सुरिंदर कुमार और डिप्टी मेयर संदीप कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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