
सुप्रीम राहत से मिली सशर्त जमानत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से संबंधित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुकदमे में तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को सशर्त जमानत दे दी। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने Arvind Kejriwal की याचिका पर उन्हें यह राहत दी।
दोनों न्यायाधीशों ने मुख्यमंत्री को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती बौंड पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद उनके वकीलों ने जमानती बॉन्ड जमा करवा दिए। 177 दिन बाद सायं 6 बजे के करीब वे तिहाड जेल से बाहर आए। इस दौरान वे भावुक हो गए और कहा कि मेरे खून का कतरा-कतरा देश के लिए हैं। तत्पश्चात उन्होंने रोड शो निकाला। रोड शो में समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए वे अपने आवास पर पहुँचे।
इससे पूर्व सीबीआई की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर हालांकि, दोनों न्यायाधीशों ने अलग-अलग फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति कांत ने सीबीआई की ओर से की गई केजरीवाल की गिरफ्तारी को न्यायोचित करार दिया, जबकि न्यायमूर्ति भुइयां ने गिरफ्तारी को गैर जरूरी बताया। न्यायमूर्ति भुइयां ने याचिकाकर्ता की इस दलील को स्वीकार किया कि धन शोधन मामले में उनकी जमानत को विफल करने के लिए सीबीआई ने एक प्रकार से ‘पहले से तय’ गिरफ्तारी की थी।
शीर्ष अदालत का खटखटाया था दरवाजा | Arvind Kejriwal
केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से संबंधित सीबीआई के मुकदमे में जमानत की मांग और इसी मामले में गिरफ्तारी को अलग-अलग याचिकाओं के जरिये शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर अपनी याचिकाएं ठुकराए जाने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिकाओं पर पांच सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता आम आदमी पार्टी के प्रमुख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू की घंटों दलीलें पेश की थीं।
ऐसा लगता है कि सीबीआई तभी सक्रिय हुई जब ईडी द्वारा जांच किए गए धनशोधन मामले में केजरीवाल को नियमित जमानत दी गई। देरी से की गई गिरफ्तारी अनुचित और पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सीबीआई को न केवल ईमानदार होना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए। केंद्रीय जांच एजेंसी को इस धारणा को छोड़ना चाहिए कि वह पिंजरे में बंद तोता है।
-न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां
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