चंडीगढ़, 2 सितंबर (Punjab Media Team)। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को Enforcement Directorate पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ठोस सबूत पेश करने के बजाय पत्रों, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के जरिए आप नेताओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस Enforcement Directorate से मामले से जुड़े पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग चुकी है, लेकिन एजेंसी अब तक पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराने में विफल रही है।
अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा का उद्देश्य पंजाब में अराजकता पैदा करना, राजनीतिक नेतृत्व को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है, ताकि निर्वाचित सरकार स्वतंत्र रूप से काम न कर सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने कभी सीबीआई को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था, उसी तरह आज Enforcement Directorate और सीबीआई भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रही हैं।
मीडिया से बातचीत में अरोड़ा ने कहा कि ईडी द्वारा पंजाब के डीजीपी को बार-बार पत्र भेजना, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग भी शामिल है, एजेंसी की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को ईडी को पत्र लिखकर आरोपों के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा था।
अरोड़ा ने कहा, Enforcement Directorate पुख्ता सबूत दे, निष्पक्ष जांच होने दें।
अरोड़ा के मुताबिक, ईडी को 1 सितंबर को आवश्यक सामग्री के साथ एक अधिकारी भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन कोई अधिकारी संबंधित साक्ष्यों के साथ उपस्थित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि Enforcement Directorate के पास पुख्ता सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के साथ साझा किया जाना चाहिए, ताकि कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच हो सके।
आप नेता ने कहा कि Enforcement Directorate द्वारा संजीव अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक और अन्य आप नेताओं के नाम मीडिया में उछाले जा रहे हैं, जबकि अभी तक किसी गलत काम को साबित करने वाले ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उन्होंने अपने पुराने मित्र गौरव धीर का नाम मामले से जोड़ने को भी राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश बताया।
ऑल्ट प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मामलों का जिक्र करते हुए अरोड़ा ने दावा किया कि संबंधित मंजूरियां अलग-अलग वर्षों में पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों के दौरान दी गई थीं। उन्होंने कहा कि 17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 को मंजूरियां दी गईं और इनमें आप सरकार के कार्यकाल में कोई सीएलयू मंजूरी नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि यदि Enforcement Directorate को इन मंजूरियों या लेआउट प्लान में हुए बदलावों में अनियमितता लगती है तो पूरे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए, न कि केवल मौजूदा सरकार को निशाना बनाया जाना चाहिए।
अरोड़ा ने कहा, AAP सरकार ने 100% भूमि स्वामित्व की शर्त लागू की।
डेवलपर्स के लिए 25 प्रतिशत भूमि स्वामित्व नीति पर भी सवाल उठाते हुए अरोड़ा ने कहा कि यह नीति 2012 में अकाली-भाजपा सरकार के समय लागू हुई थी, जबकि आप सरकार ने 2025 में इसमें बदलाव कर डेवलपर्स के लिए 100 प्रतिशत भूमि स्वामित्व की शर्त लागू की। उन्होंने दावा किया कि इस बदलाव से पुरानी व्यवस्था की खामियों को दूर किया गया है।
ईडी की कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाते हुए अरोड़ा ने कहा कि संबंधित एफआईआर को हाई कोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। उन्होंने पूछा कि यदि मूल एफआईआर ही रद्द हो चुकी है तो ईसीआईआर का आधार क्या है।
अमन अरोड़ा ने मांग की कि जांच एजेंसी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे और जिन-जिन सरकारों के कार्यकाल में मंजूरियां और नीतिगत फैसले लिए गए, उन सभी की भूमिका की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष है तो 2012 के बाद इस मामले से जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
अरोड़ा बोले, सबूत हैं तो ED सीधे मुझसे बात करे
गौरव धीर से अपनी दोस्ती का बचाव करते हुए अरोड़ा ने कहा कि किसी व्यक्ति से दोस्ती को कथित अनियमितता से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ईडी के पास उनके खिलाफ कोई सबूत है तो एजेंसी को सीधे उनसे बात करनी चाहिए और किसी अन्य व्यक्ति का नाम इस्तेमाल कर उन तक पहुंचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अरोड़ा ने मीडिया से भी अपील की कि ईडी के आरोपों को प्रकाशित करने से पहले उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जाए और संबंधित आप नेताओं का पक्ष भी लिया जाए। उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार प्रचारित करने से लोगों की छवि प्रभावित होती है और ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आप जांच से भाग नहीं रही है और तथ्य एवं सबूतों के आधार पर निष्पक्ष जांच का स्वागत करती है। लेकिन चयनात्मक कार्रवाई, मीडिया लीक और चरित्र हनन को सबूत का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
अमन अरोड़ा ने अंत में कहा कि यदि ईडी के पास पुख्ता साक्ष्य हैं तो उन्हें पंजाब पुलिस को सौंपा जाए और कानून को अपना काम करने दिया जाए। उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैं, तो पेश करें और जांच ठीक से होने दें। सेलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की राजनीति नहीं चलेगी।”
यह भी पढ़े :- धालीवाल का BJP-Enforcement Directorate पर हमला, लगाए गंभीर आरोप





One Comment