चंडीगढ़, 4 अगस्त (Punjab Media Team)। पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को देशभर में E-20 Petrol के अनिवार्य क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार के निर्णय पर गंभीर चिंता जताते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। विधानसभा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जब तक वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा, वैज्ञानिक मूल्यांकन और राज्यों से संबंधित सभी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक ई-20 पेट्रोल के अनिवार्य क्रियान्वयन के निर्णय को स्थगित रखा जाए। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई कि उपभोक्ताओं को एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल और E-20 Petrol के बीच अपनी पसंद का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण-अनुकूल ईंधनों को बढ़ावा देना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्देश्य हैं, लेकिन ऐसी नीतियों को पारदर्शी, वैज्ञानिक और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन वाहनों को मूल रूप से ई-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन या प्रमाणित नहीं किया गया है, उन्हें बिना पर्याप्त तैयारी के इस ईंधन के उपयोग के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
प्रस्ताव में कहा गया कि पंजाब सहित देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं, जिनका निर्माण ई-20 अनुकूल इंजन विकसित होने से पहले हुआ था। ऐसे में ई-20 के अनिवार्य उपयोग से इंजन की अनुकूलता, फ्यूल सिस्टम के पुर्जों के तेजी से घिसने, माइलेज में कमी, रखरखाव खर्च बढ़ने, वारंटी विवाद और वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सदन ने आशंका जताई कि इसका सबसे अधिक आर्थिक बोझ मध्यम वर्गीय परिवारों, किसानों, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों, छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और रोजाना यात्रा करने वाले नागरिकों पर पड़ेगा।
E-20 Petrol पर पंजाब विधानसभा का बड़ा प्रस्ताव, केंद्र से तत्काल रोक लगाने की मांग
विधानसभा ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने ई-20 लागू करने की मूल समय-सीमा वर्ष 2030 से घटाकर पहले ही लागू कर दी, जिससे वाहन निर्माताओं, उपभोक्ताओं और किसानों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल सका। प्रस्ताव में कहा गया कि बढ़ी हुई परिचालन और परिवहन लागत का असर कृषि उत्पादन तथा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सदन ने केंद्र सरकार से मांग की कि E-20 Petrol की अपेक्षाकृत कम कैलोरी मान और कम ईंधन दक्षता को ध्यान में रखते हुए इसकी खुदरा कीमत उचित रूप से निर्धारित की जाए। साथ ही, ऑटोमोटिव इंजीनियरों, पेट्रोलियम विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, उपभोक्ता संगठनों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जो ई-20 के तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों का समग्र मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
प्रस्ताव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को भेजेगी पंजाब विधानसभा
प्रस्ताव में केंद्र से ई-20 के इंजन प्रदर्शन, माइलेज, उत्सर्जन, रखरखाव लागत और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन सार्वजनिक करने की भी मांग की गई। इसके अलावा, यदि यह सिद्ध होता है कि मूल रूप से ई-20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए वाहनों को अनिवार्य रूप से ई-20 इस्तेमाल करने के कारण वित्तीय नुकसान या यांत्रिक खराबी हुई है, तो प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए उचित मुआवजा व्यवस्था लागू करने का भी आग्रह किया गया।
पंजाब विधानसभा ने निर्णय लिया कि इस प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा नीति आयोग के उपाध्यक्ष को विचारार्थ भेजी जाएंगी। सदन ने स्पष्ट किया कि पंजाब ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों के पक्ष में है, लेकिन किसी भी नीति का क्रियान्वयन उपभोक्ताओं के हितों, वैज्ञानिक तथ्यों और संविधान की संघीय भावना के अनुरूप होना चाहिए।
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