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Sadak Suraksha Force ने रचा इतिहास, हजारों लोगों की बचाई जान

Sadak Suraksha Force created history, saved the lives of thousands of people.

Sadak Suraksha Force created history, saved the lives of thousands of people.

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मोहाली (एसएएस नगर), 13 अगस्त (Punjab Media Team)। पंजाब पुलिस की ‘Sadak Suraksha Force’ (SSF) सड़क दुर्घटनाओं में तत्काल मदद और लोगों की जान बचाने के साथ-साथ तकनीक आधारित हाईवे सुरक्षा का नया मॉडल तैयार कर रही है। ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से एसएसएफ पंजाब पुलिस को देश का पहला 3डी पुलिस बल बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक Sadak Suraksha Force ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुंचकर 47,386 लोगों की सहायता की। इनमें 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, एसएसएफ की तैनाती वाले मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 45 से 48 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि Sadak Suraksha Force के निगरानी वाले मार्गों पर दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 2023 में 1,955 से घटकर 2024 में 1,016 रह गई। उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष में इन मार्गों पर करीब 940 लोगों की जान बचाई गई।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 27 जनवरी 2024 को जालंधर में एसएसएफ का औपचारिक शुभारंभ किया था। वर्तमान में बल के पास 144 हाईटेक वाहन और 1,600 से अधिक प्रशिक्षित कर्मी हैं, जिनमें करीब 28 प्रतिशत महिलाएं हैं। एसएसएफ को करीब 4,100 किलोमीटर हाईवे और प्रमुख जिला सड़कों पर हर 30 किलोमीटर के अंतराल पर तैनात किया गया है।

‘प्लैटिनम 10 मिनट’ मॉडल से हादसों में तुरंत मदद, Sadak Suraksha Force बनी जीवनरक्षक फोर्स

Sadak Suraksha Force का पूरा मॉडल ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ सिद्धांत पर आधारित है। इसका लक्ष्य दुर्घटना स्थल पर छह से आठ मिनट में पहुंचना है। वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर, ई-चालान मशीन, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध हैं। कर्मियों को क्रैश इन्वेस्टिगेशन और आपातकालीन चिकित्सा सहायता का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

एसएसएफ ने सड़क दुर्घटनाओं के अलावा चोरी के वाहन और छह किलोग्राम अफीम बरामद करने, नकदी व सोना उनके मालिकों तक पहुंचाने तथा 12 से अधिक लोगों की जान बचाने में भी भूमिका निभाई है। टीमों ने स्कूली बच्चों, देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों की भी मदद की है।

फेज-II में विस्तार

फेज-II के तहत एसएसएफ का कवरेज 5,500 से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा। ‘विजन एसएसएफ-2047’ के तहत सैटेलाइट डेटा, एआई, ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीक को एकीकृत कर दुर्घटनाओं और यातायात जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने की योजना है।

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, एएनपीआर, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और मोबाइल इंटरसेप्टर के जरिए दुर्घटनाओं पर औसत प्रतिक्रिया समय सात मिनट से कम किया गया है। पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के जरिए इस मॉडल को मजबूत कर रहा है।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि लक्ष्य केवल आधुनिक वाहन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पुलिसिंग को कार्रवाई से सेवा की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा कि पंजाब को देश का रोड सेफ्टी हब बनाने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और समन्वय पर लगातार काम किया जा रहा है।

एसडीजीपी ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी अमरदीप सिंह राय ने कहा कि एसएसएफ कर्मियों का मुख्य प्रदर्शन मानक सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों की सहायता है। उन्हें वीआईपी या सामान्य कानून-व्यवस्था ड्यूटी में नहीं लगाया जाता, ताकि वे हर समय सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर केंद्रित रह सकें।

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