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Sacrilege Bill राज्यपाल की मंजूरी के साथ बना कानून

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कमजोर कानूनों और सियासी संरक्षण के युग का हुआ अंत : हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़, 19 अप्रैल (Punjab Media Team)। भगवंत मान सरकार ने आधिकारिक तौर पर ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल’ लागू कर दिया है। पंजाब के राज्यपाल ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (Sacrilege Bill) के दोषियों के लिए उम्रकैद की व्यवस्था वाले इस कानून को मंजूरी दे दी है।

आज यहां पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कैबिनेट मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने इस कदम को भाईचारे की साझेदारी को बनाए रखने और धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता को बरकरार रखने के लिए एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने आगे कहा, ‘इतिहास एक परेशान करने वाले पैटर्न को दर्शाता है जहां अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बेअदबी की घटनाएं हुईं, खास तौर पर 1986 की नकोदर घटना और 2015 के बरगाड़ी और बहिबल कलां मामलों का हवाला दिया जा सकता है।’

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें इंसाफ सुनिश्चित बनाने में नाकाम रहीं। उन्होंने कहा, ‘पिछली सरकारों के अधीन विभिन्न आयोगों और विशेष जांच टीमों के गठन के बावजूद, कार्रवाई रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सबूत गायब हो गए और जांच फाइलें धूल फांकती रहीं, जिससे दोषी और साजिशकर्ता कानून से बचते रहे।’

Sacrilege Bill : हर दोषी को इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा

2022 से आए बदलाव को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, ‘भगवंत मान सरकार ने दशकों से रुकी पड़ी जांचों को तेज करने के लिए अथक प्रयास किए। पहली बार, उच्च-पद की शख्सियतों, जिन्हें पहले सियासी सुरक्षा प्राप्त थी, को अदालतों से अग्रिम जमानत लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’

सरकार की वचनबद्धता को दोहराते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि हर दोषी को इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा, चाहे उसका सामाजिक या राजनीतिक कद कुछ भी हो।

कानून की व्यवस्थाओं के बारे में बताते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘नया बनाया गया कानून व्यापक और ठोस तैयार किया गया है, जिसमें दोषियों के इंसाफ से बचने के लिए कोई खामी नहीं छोड़ी गई। यह एक्ट न सिर्फ उन लोगों को निशाना बनाता है जो शारीरिक तौर पर बेअदबी की घटनाएं अंजाम देते हैं, बल्कि मास्टरमाइंडों और साजिशकर्ताओं को भी घेरे में लाता है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा, यह कानून मुकदमे से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘मानसिक अस्थिरता’ के आम बचाव को भी संबोधित करता है। नई व्यवस्थाओं के तहत, यदि किसी संरक्षक की देखभाल के अधीन कोई व्यक्ति ऐसी हरकत करता है, तो संरक्षक या देखभाल करने वाले को भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिससे पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।’

जहां पिछली सरकारों ने मिलकर कमजोर कानून बनाए

अपने संबोधन की समाप्ति करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘यह कानून मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और ‘आप’ कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब के लोगों से की गई एक बड़ी गारंटी को पूरा करने का प्रतीक है। जहां पिछली सरकारों ने मिलकर कमजोर कानून बनाए जो कानूनी पड़ताल में खरे नहीं उतर सके, वहीं भगवंत मान सरकार ने एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान किया है।’

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यह एक्ट पंजाब की शांति और सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिश करने वाली किसी भी ताकतों के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में काम करता है, जो एक ऐसे नए युग का संकेत देता है जहां राज्य की पूरी ताकत द्वारा धार्मिक आस्था के मान की रक्षा की जाती है।’

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