लाइसेंस पॉलिसी और सख्ती का असर, Punjab ने पार किया राजस्व लक्ष्य
चंडीगढ़, 7 अप्रैल 2026 (Punjab Media Team)। Punjab सरकार की आबकारी नीति अब सीधे तौर पर राज्य की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बनती नजर आ रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में आबकारी विभाग ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 11,782 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा तय संशोधित लक्ष्य से 582 करोड़ रुपये ज्यादा है।
सरकार इस सफलता को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि इसे अपनी नीति और सिस्टम सुधारों की जीत के रूप में पेश कर रही है। पिछले चार सालों में Punjab की आबकारी से होने वाली आय लगभग दोगुनी हो चुकी है। 2021-22 में जहां यह करीब 6,254 करोड़ रुपये थी, वहीं अब यह 11 हजार करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
Punjab सरकार का दावा है कि शराब कारोबार में पारदर्शिता लाने, अवैध बिक्री पर सख्ती करने और लाइसेंस प्रक्रिया को आसान व डिजिटल बनाने से यह बढ़ोतरी संभव हुई है। इसके साथ ही रिटेल शराब समूहों के समय पर आवंटन ने भी राजस्व को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
2026-27 के लिए सरकार ने और ऊंचा लक्ष्य तय किया
आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने और ऊंचा लक्ष्य तय किया है। इस बार कुल 12,800 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 10,520 करोड़ रुपये केवल लाइसेंस फीस से आने की उम्मीद है। यह पिछले साल के मुकाबले बड़ा उछाल माना जा रहा है।
Punjab सरकार ने सभी 207 खुदरा शराब समूहों का आवंटन पहले ही पूरा कर लिया है, जिससे साफ है कि कारोबारियों का भरोसा नीति पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इसी तरह सख्त निगरानी और तकनीकी सुधारों को जारी रखती है, तो आने वाले समय में पंजाब की आबकारी आय और तेजी से बढ़ सकती है।
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