
नई दिल्ली, 07 जुलाई 2026: (Punjab Media Team)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार पर देशभर में E-20 Petrol को जबरन लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके समर्थन में कुछ ऑटो कंपनियों से जनता को गुमराह करने वाले बयान दिलवाए गए हैं। मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की चिंताओं को दूर करने के बजाय नए-नए तरीके अपनाकर E-20 Petrol को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
केजरीवाल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रमुख ऑटो कंपनियों को बुलाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश देने को कहा कि ई-10 वाहनों में भी E-20 Petrol का इस्तेमाल सुरक्षित है। उन्होंने आरोप लगाया कि Maruti Suzuki, Toyota Kirloskar Motor और Hero MotoCorp ने सार्वजनिक रूप से यह कहा कि ई-20 के उपयोग से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होगा, जबकि उनके ओनर मैनुअल में अलग निर्देश दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न कंपनियों के वाहन मैनुअल में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि एथेनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी लिखा गया है कि यदि वाहन की माइलेज या प्रदर्शन प्रभावित होता है तो उपभोक्ता बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल का उपयोग कर सकते हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेज और उनके सार्वजनिक बयान परस्पर विरोधाभासी हैं।
E-20 पेट्रोल पर ‘आप’ का सवाल, कंपनियां दें लिखित आश्वासन
आप संयोजक ने घोषणा की कि वह संबंधित कंपनियों को पत्र लिखकर लिखित आश्वासन मांगेंगे कि यदि E-20 Petrol के उपयोग से किसी वाहन की माइलेज घटती है या इंजन, फ्यूल सिस्टम अथवा अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंचता है तो उसका मुआवजा कंपनी देगी। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह वह प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखेंगे और पूछेंगे कि ऐसे मामलों में नुकसान की भरपाई सरकार करेगी या कंपनियां।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे दोपहिया और चारपहिया वाहन हैं जो ई-20 के अनुकूल नहीं हैं। उनके अनुसार, सरकार को उपभोक्ताओं को विकल्प देना चाहिए और पेट्रोल पंपों पर ई-0, ई-10 और ई-20 तीनों प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि लोग अपनी आवश्यकता और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि कई देशों ने उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने के लिए लंबा संक्रमण काल दिया, जबकि भारत में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से लागू की जा रही है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।
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