चंडीगढ़, 22 सितंबर (Punjab Media Team)। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज Baltej Pannu ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार पर निशाना साधते हुए सिख संस्थाओं के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक अकाली दल कुर्बानियों और पंथक आंदोलनों से जुड़ा रहा है, लेकिन उनके अनुसार समय के साथ यह एक परिवार-केंद्रित राजनीतिक दल में बदल गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में Baltej Pannu ने हाल ही में सामने आए अमरजीत सिंह चावला से जुड़े मामले का हवाला देते हुए श्री आनंदपुर साहिब स्थित एसजीपीसी सराय के प्रबंधन और वहां एक महिला के ठहरने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि महिला को वहां रहने की अनुमति किसने दी, उसे सुविधाएं और वाहन किसने उपलब्ध करवाए तथा संबंधित अधिकारियों ने शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की।
अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ महिला की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद 20 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब ने चावला और अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से निष्कासित कर दिया था। दोनों को सिख संस्थाओं में काम करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। अकाल तख्त ने मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
सिख संस्थाओं में जवाबदेही को लेकर Baltej Pannu ने अकाली नेतृत्व घेरा
Baltej Pannu ने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि महिला की शिकायत के बाद संस्था स्तर पर क्या कदम उठाए गए। उन्होंने अमरजीत सिंह चावला से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक संबंधों को लेकर भी अकाली नेताओं से जवाब मांगा।
आप नेता ने 2015 के बेअदबी विवाद और कोटकपूरा तथा बहबल कलां गोलीकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं को लेकर पंजाब के लोगों के सवाल अभी भी बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन अकाली सरकार के कार्यकाल में सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची और इन मामलों को लेकर सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे।
Baltej Pannu ने आरोप लगाया कि बादल परिवार ने लंबे समय से सिख संस्थाओं पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश की है और इन संस्थाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एसजीपीसी से संबंधित संसाधनों और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और अन्य अकाली नेताओं से चावला प्रकरण सहित उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। पन्नू ने सिख बुद्धिजीवियों और समुदाय से धार्मिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
इस बीच, चावला मामले में अकाल तख्त के फैसले के बाद विवाद और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
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