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क्या है जटिल रोग?

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मधुमेह अर्थात डायबिटिज रोग (Complex Diseases) के प्रारंभिक लक्षणों में सर्व प्रमुख है। अत्यधिक मात्रा में बार-बार गंदला पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, भूख अधिक लगना, शरीर का वजन कम होते जाना, शरीर में थकावट महसूस करते रहना, चक्कर आना तथा शक्कर की मात्रा अधिक बढ़ जाने या बहुत कम हो जाने पर बेहोश हो जाना।

जब मधुमेह रोगी को सम्पूर्ण रूप से जकड़ लेता है तो रोगी में मुंह खुश्क रहना, प्यास अधिक लगना, पसीने से विशेष गंध आना, भूख की अधिकता, दुर्बलता, मटमैला या शहद के समान गाढ़ा पेशाब आना, शरीर में अधिक खुजली का चलते रहना, बार बार नजला-जुकाम होना, नींद की कमी, जीभ-गले का सूखते रहना, जीभ का कर्कश व खुरदरी होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पुरूषों में आँखों की दृष्टि का कमजोर होते जाना, महिलाओं में पैरों में विशेषकर रात में पीड़ा, दाह, जलन, ऐंठन, और अशक्ति का अनुभव होने लगता है। इस रोग का निदान मूत्र परीक्षा, रक्त परीक्षा, ग्लूकोज टोलरेन्स टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल टेस्ट, कॉर्टिजोन टेस्ट इत्यादि द्वारा किया जाता है।

उच्च रक्तचाप | Complex Diseases

उच्च रक्तचाप ( हाई ब्लड प्रैशर) को ‘गुप्त हत्यारा’ कहकर भी पुकारा जाता है। इस बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों की रक्तवाहिनियों के अत्यधिक फैल जाने से सिर और गर्दन में पीछे की ओर दर्द हो जाता है या भारीपन बना रहता है किन्तु प्रात:काल भ्रमण करने से यह शीघ्र दूर हो जाता है।

नींद न आना, घबराहट का होना, चक्कर आना, कानों में सनसनाहट का होते रहना, हाथ-पैरों में सनसनाहट (झंझनाहट) का होते रहना, नकसीर फूटना, उल्टी, जी-मिचलाना, गैस ट्रबल, कब्ज या हिचकी आदि का होना प्रारम्भ हो जाता है। चेहरा लाल हो जाता है, छाती में दर्द होने लगता है, श्वास फूलने लगता है तथा बार-बार हृदय की धड़कन बढ़ जाती है।

उच्च रक्तचाप के रोगियों की मानसिक क्रि याओं में कमी हो जाने के कारण स्मरण शक्ति में कमी होने लग जाती है तथा एकाग्रता भंग हो जाती है। लैंगिक अशक्ति का अनुभव होने लगता है तथा शरीर भी दुर्बल हो जाता है।

हाइपर एसिडिटी | Complex Diseases

अम्लपित्त या हाइपर एसिडिटी का रोगी पेट में एसिड (अम्लता) की अधिकता के कारण अपने गले और छाती में जलन महसूस करता है। उसे खट्टी डकारें आती हैं, जी मिचलाता है , मुंह का स्वाद कड़वा या खट्टा सा रहता है। अम्लपित्त के रोगी के मुंह में कभी खट्टा या कड़वा पानी आने लगता है तथा अक्सर पेट दर्द की शिकायत बनी रहती है। अफारा, कब्ज, पतले दस्त, आदि होने के साथ-साथ रोगी का शरीर कमजोर होने लग जाता है।

अम्लपित्त के रोगी का किसी काम में मन नहीं लगता। शरीर व सिर में भारीपन, हृदय प्रवेश तथा भोजन के प्रति अनिच्छा, मुंह व श्वास में दुर्गन्ध, जीभ पर सफेद-सी परत, पेट में दबाने से दर्द महसूस होना आदि लक्षण हाइपर एसिडिटी के रोगियों में पाये जाते हैं। आमाशय में वेदना, जलन व क्षोभ बना रहता है।

हाथ-पैरों व आँखों में जलन, मुंह का सूखना, बार-बार प्यास लगना, बेचैनी, घबराहट, कभी-कभी ज्वर, भूख घट जाना, शरीर में पसीना आना, सम्पूर्ण शरीर में भयंकर जलन, दुर्बलता, चक्कर आना आदि लक्षण प्रारभ हो जाते हैं। पुराना होने पर इस रोग से पीड़ित रोगी को आमाशय में छाले, व्रण या पेप्टिक अल्सर से भी जूझना पड़ सकता है।

कभी-कभी तो स्थिति यहां तक पहुँच जाती है कि रोगी के पेट में कोई भी खाद्य पदार्थ नहीं टिकता और तुरन्त उल्टी हो जाती है। अल्सर के पुराने रोगियों को पेट का कैंसर होते हुए भी देखा गया है।

अपस्मार | Complex Diseases

  • अपस्मार को मिरगीे नाम से भी जाना जाता है।
  • अंग्रेजी में इसे एपिलेप्सी के नाम से जाना जाता है।

इस रोग से पीड़ित रोगी पर जब कभी मिरगी का दौरा पड़ता है तो रोगी के दांत एकाएक भिंच जाते हैं, मुँह से झाग निकलने लगता है, पेशाब स्वत: ही कपड़ों में निकल जाता है, हाथ-पैरों में कम्पन होने लगता है तथा वह मूर्च्छित होकर एकाएक जमीन पर गिर पड़ता है।

मिरगी के दौरे के समय रोगी की दोनों आँखें और गर्दन एक ओर लुढ़क जाती हैं, मांसपेशियां ऐंठ जाती हैं, रोगी को कोई होश नहीं रहता तथा रोगी मानसिक रूप से अपने आप को असुरक्षित, हताश व निराश अवस्था में पाता है। यह दौरा एकान्त में अधिक पड़ता है तथा सोते समय नींद में भी आ सकता है। रोगी की जीभ दाँतों के बीच आकर कट सकती है। रोगी का चेहरा कुरूप, डरावना एवं ऐंठनयुक्त हो जाता है।

पक्षाघात | Complex Diseases

  • पक्षाघात को लकवा, पैरालाइसिस आदि नामों से जाना जाता है।

पक्षाघात के लक्षण इस तथ्य पर बहुत कुछ निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क का दाहिना हिस्सा शरीर के बायें भाग को तथा बांया हिस्सा दायें भांग के अंगों को प्रभावित करता है।

  • पक्षाघात की अवस्था में रोगी के शरीर का आधा भाग क्रियाहीन हो जाता है।
  • मस्तिष्क रक्तस्राव जन्य पक्षाघात में रोगी बेहोश हो जाता है।
  • रोगी का सम्पूर्ण शरीर शिथिल, शीतल व पसीने से युक्त हो जाता है।
  • शरीर का तापमान और नाड़ी की गति धीमी पड़ने लगती है तथा चेहरे पर नीलापन छा जाता है।

रोगी के श्वास लेते समय घरघराहट की आवाजें आने लगती हैं। रोगी का एक गाल फूल जाता है तथा आंख के तारे ज्यादा फैले दिखाई देते हैं।

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