बठिंडा, 29 जून: (Punjab Media Team)। पंजाब में नशों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘Yudh Nashean Virudh’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों (डीसी), पुलिस कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को अभियान को जमीनी स्तर पर और तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
विलेज डिफेंस कमेटियों के कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘Yudh Nashean Virudh’ अभियान के तहत नशों की सप्लाई लाइन को तोड़ने और बड़े नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस अभियान को और अधिक जनभागीदारी, सशक्त कार्रवाई तथा गांवों में विश्वास बहाली के प्रयासों के साथ आगे बढ़ाया जाए ताकि नशों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की जा सके।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सभी अधिकारियों को नशों के पूर्ण उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन महीनों के दौरान विलेज डिफेंस कमेटियों के सदस्यों ने नशा तस्करों के खिलाफ 13,000 से अधिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में ये कमेटियां अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं, वहां उन्हें अधिक प्रभावी बनाया जाए।
नशा तस्करों की कमर टूटी, अब निर्णायक जीत की तैयारी
भगवंत सिंह मान ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती है, इसलिए इसे जन आंदोलन का रूप देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए 1.50 लाख से अधिक सदस्यों वाली विलेज डिफेंस कमेटियों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाए और पुलिस टीमें नियमित रूप से गांवों में जाकर लोगों से संवाद करें। साथ ही नशा तस्करों की सूचना देने वाले नागरिकों और कमेटी सदस्यों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ नशा पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का व्यापक विस्तार किया गया है। इन केंद्रों में बिस्तरों की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है, जबकि ओट (ओपिऑयड असिस्टेड ट्रीटमेंट) केंद्रों की संख्या 529 से बढ़ाकर 565 कर दी गई है। उन्होंने अधिकारियों को सभी केंद्रों में दवाइयों, आवश्यक संसाधनों और पर्याप्त सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने ‘सूरमा’ पहल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के तहत दो वर्षों से अधिक समय से नशामुक्त जीवन जी रहे लोगों को सम्मानित किया जा रहा है। ये लोग अब ‘नशा मुक्ति के दूत’ बनकर अन्य लोगों को भी नशे की लत छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नशा मुक्ति, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास के लिए निरंतर निवेश करती रहेगी ताकि प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।
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