अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ को लेकर जो भी हालात बिगड़े है उसके लिए कही न कही सरकार जिम्मेदार है क्योंकि वह दावे करती है, अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं है, अधिकारियों ने जो कह दिया वहीं सही है। इस बार मौसम विभाग ने पहले चेतावनी दे दी थी और दे रहा है कि ज्यादा बारिश होगी। सरकार ने पहले से ही कोई प्रबंध नहीं किए और न ही मानसून आने से पहले नहरों, नालों और नदियों की सफाई कराई, आज प्रदेश की जनता उसी लापरवाही का दंश झेल रही है।
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार और जनता सबको मालूम है कि जब बारिश अधिक होती है तो कौन कौन सा क्षेत्र प्रभावित होता है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि पहले से उचित प्रबंध करे और चौकन्ना रहे। पहाड़ी क्षेत्रों से पानी आता है और यहां तक पहुंचने में समय भी लगता है, इसलिए सरकार को और अधिक प्रोएक्टिव होकर काम करना चाहिए। लेकिन सच यह है कि भाजपा सरकार केवल दावे करती है। सवाल यह है कि ये दावे कब पूरे होंगे अगले साल, बारिश के बाद या तब, जब सारा नुकसान हो चुका होगा? जलस्तर बढ़ने पर जितना पानी बाहर आना चाहिए था उससे कई गुना पानी बाहर आया और फसलें जलमग्न हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नहरों, नालों और नदियों की न तो सफाई कराई गई और न ही तटबंध मजबूत किए गए, जो भी काम हुआ कागजों में ही हुआ। सरकार सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनी रही। किसानों की कोई बात तक नहीं सुनी गई।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि शनिवार को उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति देखकर साफ है कि भाजपा सरकार सिर्फ आश्वासन तक सीमित है, जबकि जनता राहत की प्रतीक्षा कर रही है। ऐलनाबाद के गांव गुड़ियाखेड़ा में हिसार घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन का जायजा लिया। ग्रामवासियों ने बताया कि पानी का स्तर बढ़ने से उन्हें अपनी फसलों और घरों को लेकर गहरी चिंता है। भाजपा सरकार समय रहते कदम क्यों नहीं उठा रही? इंतज़ार किस बात का है क्या हालात बिगड़ने और नुकसान होने के बाद ही प्रबंध किए जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, समय पर राहत चाहिए। प्रशासन से मांग है कि तुरंत ठोस प्रबंध किए जाएं ताकि किसी भी अनहोनी से गांव और किसानों को बचाया जा सके।
सांसद ने प्रदेश की भाजपा सरकार से मांग की है कि बाढ़ से फसलों को जो भी नुकसान हुआ है उसकी विशेष गिरदावरी करवाई जाए और फसलों को जो भी नुकसान हुआ है उसका मुआवजा जल्द से जल्द दिया जाए, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किए जाए, मानसून से पहले नहरों, नालों और नदियों की साफ सफाई और तटबंधों को मजबूत न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जिन्होंने यह कार्य केवल कागजों में ही दिखाया हुआ है उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया जाए क्योंकि किसी भी अधिकारी को जनता की जान से खिलवाड़ करने का कोई हक नहीं है। किसान चीख चीख कर कह रहे कि इस बार नहरों, नालों और घग्गर नदी की सफाई नहीं हुई, लोगों प्रशासनिक अधिकारियों को फोटो और वीडियो तक दिखा रहे थे पर कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार तक नहीं हुआ।

