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‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ में Narcotics एनोनिमस मीटिंग्स बनीं बदलाव की ताकत

Narcotics Anonymous meetings have become a force for change in the 'War Against Drugs'.
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चंडीगढ़, 23 जून 2026: (Punjab Media Team)। पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान को और मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्य के 13 जिलों में Narcotics Anonymous (एनए) मीटिंग्स आयोजित की जा रही हैं। यह पहल नशा छोड़ चुके लोगों को लंबे समय तक नशा-मुक्त बनाए रखने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पंजाब सरकार पोस्ट-ट्रीटमेंट रिहैबिलिटेशन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी उद्देश्य से लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी) फेलोज के सहयोग से सरकारी डि-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन केंद्रों में नियमित जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम वर्तमान में श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना, रूपनगर, मानसा समेत 13 जिलों में संचालित हो रहा है।

इन बैठकों का उद्देश्य रिकवरी कर रहे लोगों को ऐसा सुरक्षित और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी डर या झिझक के अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कर सकें। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वही लोग दूसरों का मार्गदर्शन करते हैं, जो स्वयं नशे की समस्या से बाहर निकल चुके हैं।

साझा अनुभव और सहयोग से नशामुक्ति को मजबूती देता है Narcotics Anonymous

Narcotics Anonymous एक वैश्विक संगठन है, जिसकी स्थापना 1953 में हुई थी। यह संस्था 12-स्टेप प्रोग्राम और पीयर सपोर्ट मॉडल के माध्यम से लोगों को नशा-मुक्त जीवन अपनाने में मदद करती है। इसका मूल सिद्धांत है कि साझा अनुभव और सामुदायिक सहयोग से रिकवरी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनती है।

श्री मुक्तसर साहिब में रिकवरी कर रहे एक व्यक्ति ने बताया कि एनए मीटिंग्स ने उन्हें लंबे समय तक नशा-मुक्त रहने का आत्मविश्वास दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों या महीनों तक नशे से दूर रहना संभव है, लेकिन स्थायी रूप से नशा छोड़ने में पीयर ग्रुप का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है।

लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर में उपचाराधीन एक मरीज ने बताया कि अन्य लोगों के अनुभव सुनकर उन्हें नई प्रेरणा मिली और अपनी कहानी साझा करने से उन्हें सकारात्मक सुझाव प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि उपचार के साथ-साथ ऐसी बैठकों का नियमित हिस्सा बनना बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डि-एडिक्शन सेंटर छोड़ने के बाद कई लोग अकेलापन महसूस करते हैं, जिससे उनके दोबारा नशे की ओर लौटने का खतरा बढ़ जाता है। एनए मीटिंग्स उन्हें एक मजबूत सपोर्ट नेटवर्क प्रदान करती हैं और यह भरोसा दिलाती हैं कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं।

अधिकारियों ने बताया कि कई पूर्व नशा उपयोगकर्ता अब स्वयंसेवक और मेंटर बनकर जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एनए नेटवर्क का विस्तार नशा विरोधी अभियान की सफलता को लंबे समय तक कायम रखने के लिए बेहद जरूरी है।

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