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पंजाब में Ground Water स्तर में सुधार, 2026 में दोहन दर घटकर 152.22% हुई

Improvement in ground water levels in Punjab; extraction rate drops to 152.22% in 2026.
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चंडीगढ़, 31 अगस्त (Punjab Media Team)। पंजाब के लिए Ground Water संकट के मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के 2026 के ताजा आकलन के अनुसार दशकों बाद पहली बार राज्य के भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि भूजल दोहन की दर वर्ष 2022 के 164 प्रतिशत से घटकर 2026 में 152.22 प्रतिशत रह गई है।

पंजाब भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाने, नहरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और Ground Water पर निर्भरता कम करने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर सामने आया है।

उन्होंने बताया कि वार्षिक Ground Water निकासी 2022 में 28.02 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 2026 में 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गई है। वहीं, अति-शोषित ब्लॉकों की संख्या 117 से घटकर 110 हो गई, जबकि सुरक्षित ब्लॉकों की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है।

मंत्री ने कहा कि राज्य के 153 आकलन किए गए ब्लॉकों में से 109 में Ground Water की स्थिति में सुधार हुआ है। वर्ष 2025 की तुलना में 14 ब्लॉक बेहतर श्रेणी में पहुंचे हैं, जिनमें चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में शामिल हुए हैं।

पंजाब में Ground Water संकट पर राहत, दशकों बाद पहली बार स्तर में सुधार दर्ज

फाजिल्का के अर्नीवाला शेख सुभानपुर, फिरोजपुर के मखू, होशियारपुर के हाजीपुर और पठानकोट के नरोट जैमल सिंह अर्ध-गंभीर से सुरक्षित श्रेणी में पहुंचे हैं। वहीं फिरोजपुर और ममदोट गंभीर से अर्ध-गंभीर, जबकि गुरदासपुर और काहनूवान अति-शोषित से गंभीर श्रेणी में आए हैं।

गोयल ने कहा कि नहरी पानी के उपयोग में भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2022 तक जहां इसका इस्तेमाल लगभग 26 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया है। इसके लिए सरकार ने करीब 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और हजारों किलोमीटर खालों तथा सिंचाई ढांचे का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है।

उन्होंने बताया कि पंजाब में 1,117 नहरें और माइनर हैं। नहरी नेटवर्क की क्षमता करीब 36,000 क्यूसेक होने के बावजूद इस वर्ष 1 जून से लगभग 39,000 क्यूसेक पानी की नियमित आपूर्ति की जा रही है। इससे किसानों को ट्यूबवेल के बजाय नहरी पानी से सिंचाई का विकल्प मिला है।

मंत्री के अनुसार, नहरी पानी सीधे खेतों तक पहुंचने से Ground Water की बचत के साथ बिजली की खपत में भी करीब 16 प्रतिशत कमी आई है। इसके अलावा राज्य में 510 से अधिक भूजल रिचार्ज योजनाएं चल रही हैं, जिनमें तालाबों और अन्य रिचार्ज संरचनाओं के माध्यम से करीब 38 लाख घन मीटर भूजल रिचार्ज में योगदान मिला है।

गोयल ने कहा कि भूजल संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि पंजाब की कृषि और देश की खाद्य सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नहरी सिंचाई को और मजबूत करते हुए Ground Water दोहन को लगातार कम करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है।

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