4.20 करोड़ की ड्रग्स व 1.17 करोड़ की नगदी सहित 6 दबोचे
चंडीगढ़। नशे के कारण देश भर में बदनाम हो रहे हरियाणा प्रदेश के हिसार प्रशासन की नाक तले अवैध रूप से ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री चलती मिली। इतना ही नहीं ड्रग्स बनाने की इस फैक्ट्री से 18 किलोग्राम मादक पदार्थ व एक करोड़ 17 लाख रुपए की नगदी भी बरामद हुई। छापेमारी के दौरान मौके पर जो 18 किलोग्राम अल्प्राजोलम का पाउडर मिला है। उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4 करोड़ 20 लाख रुपए है।
पुलिस ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि ड्रग्स की यह फैक्ट्री हिसार जिले के गांव सिसवाला में चल रही थी। सिसवाला गांव में बायोकेस फूड्स एंड एक्सट्रैक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी में प्रतिबंधित ड्रग्स अल्प्राजोलम बनाई जा रही थी। खास बात यह है कि कंपनी का मालिक नवीन अग्रवाल आर्य नगर में एक हर्बल न्यूट्रिशन कंपनी भी चलता था।
इसकी आड़ में ही वह र्ड्ग्स के धंधे में उतर गया। इस संबंध में पुलिस ने एक करोड़ 17 लाख 60 हजार 350 रुपए की नगदी सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले के अनुसार राजेंद्र कुमार मिश्रा उर्फ आरपी ड्रग सप्लाई के लिए कमीशन के आधार पर दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर ड्रग्स की सप्लाई करता था। ड्रग्स के इस धंधे में नवीन व राजेंद्र के अलावा राम आशीष, दीपक व आनंद कुमार भी शामिल रहे।
इस प्रकार बढ़ता गया नशे का कारोबार
पुलिस के अनुसार नवीन अग्रवाल ने सिसवाला से किरतान रोड पर पीर बाबा मजार के समीप अल्प्राजोलम नमक मादक पदार्थ बनाना शुरू किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी दीपक से हो गई। दीपक इसी फैक्ट्री में रहता था। ग्रामीणों ने बताया कि जब इस फैक्ट्री में काम चलता है तो उसके मुख्य गेट हमेशा बंद रहते हैं। किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होती। इतना ही नहीं यहां काम करने के लिए भी बाहर से काम करने वाले रखे गए हैं। ताकि लोगों को इसकी भनक भी नहीं लग सके।
डिप्रेशन के मरीजों के इलाज के लिए प्रयोग की जाती है अल्प्राजोलम
अल्प्राजोलम एक प्रतिबंधित ड्रग्स है,जो सिर्फ मनोरोग विशेषज्ञ की नोटिंग पर ही डिप्रेशन के मरीजों को उपलब्ध करवाई जाती है। लेकिन आजकल युवा इस दवाई का नशे के लिए धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
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