लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा | Code of Conduct
चुनाव आयोग जैसे ही देश में विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा करता है, वैसे ही मॉडल Code of Conduct यानी आचार संहिता लागू हो जाती है। वहीं अब लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी अंतिम दौर में है तो ऐसे में हर व्यक्ति जानना चाहता है कि लोकसभा चुनाव कब होंगे और आचार संहिता कब लगेगी।
आपको बताते चलें कि लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता 10 मार्च के बाद कभी भी लग सकती है, यानी लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हो जाएगी। Code of Conduct लागू होने पर चुनावी राज्यों में राजनीतिक दलों को इसका पालन करना अनिवार्य हो जाता है। इस लेख के माध्यम से हम आदर्श चुनाव आचार संहिता व इससे जुड़े अन्य तथ्यों को जानेंगे।
क्या होती है आदर्श चुनाव Code of Conduct
सबसे पहले, तो हम यह जान लेते हैं कि आखिर आदर्श चुनाव आचार संहिता क्या होती है। आपको बता दें कि जब भी चुनाव आयोग की ओर से लोकसभा व विधानसभा चुनावों का आयोजन किया जाता है, तो इससे पहले से ही आदर्श चुनाव संहिता को लागू किया जाता है, जिसकी मदद से चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से हो सके।
इसके तहत कुछ नियमों को तय किया जाता है, जिसका चुनावी प्रक्रिया के दौरान संबंधित राजनीतिक पार्टियों को पालन करना होता है। चुनाव आचार संहिता को चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही लागू कर दिया जाता है और यह चुनाव समापन तक जारी रहती है।
Code of Conduct का पालन नहीं करने पर परिणाम
यदि कोई राजनीतिक दल या फिर राजनीतिक दल का कोई प्रत्याशी चुनावों के समय में आदर्श आचार संहिता का पालन नहीं करता है, तो उस पर चुनाव आयोग की ओर से कार्रवाई की जाती है। उदाहरण के तौर पर आचार संहिता का पालन नहीं करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है तथा इसके साथ-साथ कानूनी प्रकिया भी अपनाई जा सकती है व आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है, वहीं नियमों का पालन न करने की वजह से जेल भी जाना पड़ सकता है।
Code of Conduct के कुछ प्रमुख नियम कौन-से हैं
आचार संहिता के कुछ प्रमुख नियमों के बारे में आपको बताते चले कि जब भी एक बार लोकसभा या विधानसभा चुनावों की घोषणा हो जाती है, तो आचार संहिता के तहत कोई भी सत्ताधारी दल सरकारी योजनाएं, लोकार्पण, शिलान्यास या भूमि पूजन भी नहीं कर सकता है, इसके साथ ही वह सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनावों के प्रचार या प्रसार के लिए नहीं कर सकता।
- उम्मीदवार चुनाव में अपने प्रचार प्रसार या चुनावों के प्रचार प्रसार के लिए कोई चुनावी रैली या राजनीतिक पार्टी का जूलुस निकालना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी स्थानीय पुलिस से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
- आचार संहिता के लागू होने के बाद कोई भी उम्मीदवार राजनीतिक दल जाति या धर्म के आधार पर वोट नहीं मांग सकता है और ना ही इस प्रकार की किसी भी कोई गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
- चुनाव प्रचार के दौरान आप अन्य किसी भी व्यक्ति की जमीन या घर या कार्यालय की दीवार पर जिसकी प्रॉपर्टी, दुकान मकान है, उन प्रॉपर्टी के मालिक की अनुमति के बिना आप अपना चुनाव प्रचार का पोस्टर, बैनर या झंडा नहीं लगा सकते।
- जिस दिन मतदान होता है उस दिन शराब की दुकानों को बंद रखा जाता है। चुनाव में आप अपनी वोटों के लिए शराब और रुपयों को बांटना भी आपारिक मामलों में आता है, यह आप नहीं कर सकते।
- यह भी ध्यान रखा जाता है कि मतदान शिविर साधारण हो और वहां किसी भी तरह की प्रचार सामाग्री मौजूद न हो।
- सभी राजनीतिक दल इस तरह से गतिविधि से दूर रहेंगे, जो कि गलत आचरण में आते हैं।
- राजनीतिक दल मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए अपनी गाड़ी की सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।
- राजनीतिक दल किसी भी मतदाता को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए डरा या धमका नहीं सकते हैं।
कब शुरू हुई थी Code of Conduct
आपको बता दें कि आचार संहिता की शुरूआत 1960 में केरल आम चुनाव से हुई थी। उस समय राजनीतिक दलों से बातचीत कर इसका दस्तावेज तैयार किया गया था। 1967 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी आचार संहिता का पालन किया गया था। बाद में अलग-अलग नियमों को जोड़ा गया।
Read Also:
करोड़ों के मालिक हैं हरियाणा के नए CM, जानिए कौन है कितनी सम्पति का मालिक
Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

