चंडीगढ़, 3 जून: (Punjab Media Team)। पंजाब में Private Schools द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के खिलाफ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचे की घोषणा करते हुए निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि पर पांच फीसदी की अधिकतम सीमा तय करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ भारी जुर्माने से लेकर मान्यता और एफिलिएशन रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस प्रस्तावित कानून को देश में निजी स्कूलों की फीस नियंत्रण संबंधी सबसे सख्त कानून बताया है। यह कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा और पंजाब के सभी निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पांच फीसदी की सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य फंड, शुल्क और अन्य खर्चों पर भी लागू होगी, ताकि किसी भी प्रकार से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जा सके।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अमृतसर की हालिया दुखद घटना के बाद उन्हें बड़ी संख्या में अभिभावकों के फोन प्राप्त हुए, जिनमें निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही फीस को लेकर चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य और माता-पिता की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। उन्होंने दोहराया कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर 15 फीसदी से अधिक फीस वृद्धि की है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस करनी होगी।
मान सरकार का बड़ा फैसला, Private Schools फीस बढ़ोतरी पर 5% सीमा
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस संरचना ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ के तहत नियंत्रित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में किए गए संशोधनों के कारण स्कूलों को निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने का रास्ता मिल गया था, जबकि पिछली सरकारें इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहीं।
मान ने कहा कि मूल कानून में फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा आठ फीसदी तय थी, लेकिन बाद में लागू किए गए ‘डिस्क्लोजर मैकेनिज्म’ के जरिए स्कूलों को उससे अधिक वृद्धि करने की अनुमति मिल गई। स्कूलों को केवल प्रस्तावित बढ़ोतरी की जानकारी सार्वजनिक करनी होती थी, लेकिन व्यवहार में इस व्यवस्था का सही ढंग से पालन नहीं हुआ। नतीजतन कई स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई और अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि फीस बढ़ोतरी से जुड़ी सभी लंबित शिकायतों की जांच की जाएगी। जिला स्तर पर गठित रेगुलेटरी बॉडी को अधिक अधिकार दिए जाएंगे ताकि वह अत्यधिक फीस वृद्धि, मुनाफाखोरी और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई कर सके। यह संस्था यह भी सुनिश्चित करेगी कि विद्यार्थियों से वसूली गई राशि का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। Private Schools
मनमानी फीस वसूली पर सख्ती, अतिरिक्त रकम लौटाएंगे स्कूल
सरकार ने संकेत दिया है कि स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विशेष समिति भी गठित की जा सकती है, जो पिछले तीन से पांच वर्षों के खातों की समीक्षा करेगी। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि फीस वृद्धि वास्तव में आवश्यक खर्चों के कारण की गई थी या फिर केवल लाभ कमाने के उद्देश्य से।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस अध्यादेश का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और उनके परिवारों को आर्थिक शोषण से बचाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की लूट-खसोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर अब प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा।
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