किसान आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा किए अत्याचारों को हरियाणा की जनता को याद दिलाएंगे: पंढेर
चंडीगढ़। पिपली अनाज मंडी में किसान मजदूर मोर्चा व एसकेएम गैर राजनीतिक के बैनर तले कियान यूनियनों की महापंचायत आयोजित हुई। इस महापंचायत में हजारों किसान पहुंचे। इस महापंचायत में कई बडे निर्णय किसानों द्वारा लिए गए। किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर 3 अक्तूबर को रेलवे टे्रक जाम करने का ऐलान किया। किसानों का कहना था कि हरियाणा में पंचायतें कर भाजपा द्वारा किसानों पर किए अत्याचार को याद करवया जाएगा। किसानों नेताओं ने ऐलान किया कि हरियाणा के किसान भाजपा की हार में हिस्सेदार बनेंगें।
इस महापंचायत में किसान नेता सरवन सिंह पंढेर, जगजीत सिंह दल्लेवाल, अमरजीत सिंह मोहड़ी सहित कई किसान नेताओं ने हिस्सा लिया। महापंचायत में महिला किसान भी भारी संख्या में पहुंची। कई घंटों तक चली इस महापंचायत में सैंकड़ों की संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरवन सिंह पंधेर ने कहा की हरियाणा भर में किसानों द्वारा महापंचायत की जा रही है और भाजपा सरकार ने जिस प्रकार के अत्याचार किसानों पर किए हैं। अब हरियाणा में इसका बदला लेने का समय आ गया है।
पंचायत कर हरियाणा के किसानों को याद दिलाया जा रहा है कि किस प्रकार से किसानों पर बल का प्रयोग किया गया और किस प्रकार से किसान शुभकरण को शहीद किया गया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 3 अक्टूबर को भारत भर में 2 घंटे के लिए रेलवे ट्रैक जाम किए जाएंगे और आने वाले समय में आंदोलन को ओर गति दी जाएगी। किसान नेता अमरजीत सिंह मोहड़ी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य दूसरे राजनीतिक दलों को भी सचेत करना है कि अगर सत्ता में आने के बाद वह किसानों के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार करेंगे तो किस प्रकार एक होकर उनके खिलाफ भी लड़ाई लड़ेगा। किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और आने वाले समय में इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।
मांगे नैतिक तौर पर जायज : किसान नेता
किसान नेताओं ने महापंचायत के दौरान कहा कि उनक मांगे जायज हैं लेकिन सरकार मान नही रही है। इसके चलते रेलवे ट्रेक जाम करने का फैसला लिया गया है। उन्होने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में एमएसपी लीगल गारंटी कानून बनाया जाए। किसानों मजदूरों की कर्ज माफी कर जाए व भारत डब्ल्यूटीओ से बाहर आ जाए मुख्य मांगें हैं। उन्होने कहा कि लखीमपुरी खीरी के पीडित भी उनके पास पहुंचे हैं। लखीमपुर खीरी का हिसाब न्याय नही अभी तक पीडित किसानों को नही मिला है। जब तक मांगें नही मानी जाती किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।
Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

