चंडीगढ़, 6 जुलाई: (Punjab Media Team)। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने फिल्म ‘सतलज’ को एक ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे पंजाब के इतिहास को दबाने की कोशिश बताया। पार्टी के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने अलग-अलग समय पर Jaswant Singh Khalra के मुद्दे पर पंजाब के लोगों को निराश किया है।
सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बलतेज पन्नू ने कहा कि डिजिटल दौर में फिल्में और डॉक्यूमेंट्री नई पीढ़ी तक इतिहास पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 1978, 1984 और 1990 के दशक की घटनाओं को समझने के लिए युवाओं को तथ्यात्मक सामग्री उपलब्ध कराना जरूरी है। ऐसे में ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित फिल्मों को हटाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
पन्नू ने कहा कि Jaswant Singh Khalra के जीवन पर आधारित फिल्म को पहले ‘घलूघारा’, फिर ‘पंजाब 95’ और अंततः ‘सतलज’ नाम से रिलीज किया गया। उन्होंने कहा कि वर्षों की देरी के बाद रिलीज हुई इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से केवल दो दिन में हटा दिया गया, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं राजनीतिक दबाव में इतिहास को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra के उस संघर्ष को सामने लाती है, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के दौर में कथित लावारिस लाशों के गैर-कानूनी अंतिम संस्कार के मामलों का खुलासा किया था। पन्नू ने आरोप लगाया कि ये घटनाएं कांग्रेस शासन और राष्ट्रपति शासन के दौरान हुई थीं, इसलिए कांग्रेस इस विषय पर बनी फिल्म से असहज है।
Jaswant Singh Khalra पर तीनों दलों ने पंजाब को किया निराश: बलतेज पन्नू
भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र सरकार पंजाब के दर्दनाक इतिहास को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से भी स्पष्ट करने की मांग की कि फिल्म को हटाने के पीछे किसका दबाव था।
शिरोमणि अकाली दल पर हमला बोलते हुए पन्नू ने कहा कि आज पार्टी फिल्म के समर्थन में बयान दे रही है, लेकिन जब Jaswant Singh Khalra लापता हुए थे, तब उनके परिवार को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने परमजीत कौर खालरा के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अकाली दल सरकार के रवैये पर सवाल उठाए थे। पन्नू ने आरोप लगाया कि 1996 के चुनावी वादों के बावजूद अकाली दल सरकार ने कथित मामलों की जांच के लिए ‘ट्रुथ कमीशन’ का गठन नहीं किया।
पन्नू ने कहा कि किसी फिल्म को हटाने से इतिहास नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालरा की कहानी मानवाधिकारों और सच के लिए संघर्ष की कहानी है, जिसे सेंसरशिप के जरिए दबाया नहीं जा सकता। आम आदमी पार्टी ने मांग की कि फिल्म ‘सतलज’ को तुरंत ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बहाल किया जाए ताकि युवा पीढ़ी पंजाब के इतिहास को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के जान सके।
यह भी पढ़े :- Mukh Mantri Sehat Yojana ने लाखों परिवारों का इलाज का बोझ घटाया

